इसमें कुल सोलह कहानियाँ हैं| ‘सुचरिता’ मेरी सातवीं कहानी-संग्रह है| मैं अपने विगत कृतित्व को आलोचक की दृष्टि से देखने की अनाधिकार चेष्टा करना नहीं चाहती, तब युगधारा के संग, मेरी कहानियों का कैसा सम्बंध है, एक लेखिका होने के नाते, आप पाठकों का इस ओर ध्यान आकृष्ट कराना मेरा कर्त्तव्य है और परम धर्म भी| यद्यपि मैं ऐसा कहने का दुस्साहस कभी नहीं कर सकती, कि ‘सुचरिता’ कहानी-संग्रह, एक ऐसा जन-जन का प्रतिनिधि-संग्रह है, जो वर्त्तमान युग-मानस का दर्पण कहलायेगा| इसमें पूरी तरह समाज की भावनाओं और आकांक्षाओं का धार्मिक और सांस्कृतिक स्वर मुखरित हुआ है, यह भारतीय समाज, जातीय, धार्मिक जीवन का सुस्पष्ट प्रतिबिम्ब है|

सुचरिता

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