यह किताब समाजिक कुरीतियों पर एक सवाल है। यह किताब लिखने का एक कड़ा उद्देश्य है कि पढ़ने वाले अपने अंदर बदलाव की चाहत को हौंसला दे सकें। हमें हमारी ज़िन्दगी में ऐसे कई लोगों का सामना करना पड़ता है जो हमारे सपनों की उड़ान पर रोक लगाने की पूर्ण कोशिश करते हैं। इस किताब में लिखी हर एक कविता ऐसे नकारात्मक लोगों का डटकर सामना करने में और आपको अपने सपनों की उड़ान में पंख लगाने का साहस देगी। हर कविता में लिखे 'मैं' की जगह पर आप अपने आप को उस स्थान पर डाल कर कविता को महसूस करने का प्रयास करें।

पारदर्शी : मेरी नज़र से

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  • Author Name: Prateek Kashyap
    About the Author:  "दर्द में हैं, आबाद रहने दो; वक्त से हैं, बर्बाद रहने दो; ना करो मरहम मर्ज़ों पर मेरे; ज़ख्मों को मेरे शादाब रहने दो।" एक मुखौटे के पीछे छिपे कई चेहरों में से एक चेहरा लेखक का है। एक उधमी, मुसाफ़िर और प्रेक्षक के मिश्रण से बना हुआ एक व्यक्तित्व जिसने अपने लिए गए अनुभवों को पूरी सच्चाई के साथ व्यक्त करने का प्रयास किया है।
    Book ISBN: 9789323755958