पुस्तक लिखने का मुख्य उद्देश्य, किसी को किसी भी प्रकार की ठेस पहुँचाये बिना, अपने देश एंव ईश्वर पर विश्वास बनाये रखने के प्रयास को लेकर है | ईश्वर संसार में विद्यमान है, हमारे आस – पास है, अन्दर है, वास्तव में कण – कण में है | जहाँ विज्ञान, एक तरफ आँसमान में छिद्र करके अद्भुत खेल खेल रहा है, वहीं ईश्वर ज्ञान – विज्ञान आदि से काफी – काफी बढकर है | वह ब्रह्माण्ड़ में भी समाहित है और पूरा ब्रह्माण्ड़ उसके अन्दर भी है !
पिता भी वही है और पुत्र भी, और इनसे भी बढकर वह अद्भुत शक्ति है जो पुत्र की माँ बनी है | पुत्र के पिता का उस माँ पर अधिकार भी है और पुत्र रूप में उसी माँ की गोद में खेलकर उनका प्यार – दुलार पाने का हक भी ! साथ ही पिता, पुत्र और माँ एक – दूसरे से अलग नही है, यह एक ही शक्ति है जो तीन रूपों में विद्यमान है और ये हमसे अधिक दूर नही बल्कि हमारे अन्तर्मन में है, दिलोदिमाग में है, पूरी तरह यादों में है, रामकृष्ण परमहंस जी ( पिता ), शारदा देवी एंव महाकाली दुर्गा मैया ( माँ ) और पुत्र रूप में स्वामी विवेकानन्द जी है | ये तीनों ही संसार है, अनन्त है, परमात्मा है !!!

प्यार से परमात्मा तक

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