Description of the Book:

 

दौर ऐसा आया की अब वक़्त ही न रहा ठहरने का। भागते भागते मंज़िलो को हासिल करने में जुट चुके है‌; कामयाबी और ख़ुशी के पलों को इक्कठा करने में लग जो गए है। ऐसे में रिश्तों की डोर कुछ पक्की रहती है और कुछ कच्ची। पक्के रिश्ते उतार-चढ़ाव के बावजूद टिके रहते है,जबकि अकसर, कच्चे डोर टूट जाते है। इन सबसे अलग ऐसे कुछ कच्चे बंधन होते है, नाज़ुक से कमज़ोर से टूटने का डर तो बड़ा रहता है, पर बिल्कुल चुंबक की तरह पास खींच लेती है।। बिखरने के पश्चात,‌कच्चे धागों को गांठ बांधकर‌ जोड़ा जाता है। कहते हैं, प्यार की कमी को पूरी करने में सचाई और सम्मान का रस अपना सहयोग देती है। क्या पता यह रस भी गांठ की तरह कच्चे रिश्तों को बांधे रखे? मजबूरी में नहीं, पर खोया हुआ वजूद से फिर मुलाकात‌ हो जाए।। कच्चे धागे भी पक्के लग जाए! ऐसी एक दास्तान पेश है- कच्चे धागे

कच्चे धागे

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  • Author's Name: Mariya Mathew
    About the Author: The soulful author and raconteur, Mariya Mathew is a believer in everything that moves the heart. As someone who longs to be surprised, loves the comfort in silence and prefers the nightsky over a sprawling sun, she is a traveller in a land where language is an abstract mix of feelings and tunes. Being the avid writer, reader and friend that she is, she pursues medicine to reason with the realities of life. She is on a quest to make you sing the unsung and feel the unfelt. With her first book, she aims to capture the essence of life, through her words and thoughts wrapped in poems.
    Book ISBN: 9780463534519