Description of the Book:
 

कहते है शब्द आपके मन का आइना होते है । बिलकुल उसी तरह ये कविताएं मेरी भावनाओं का प्रतिरूप है । समय समय पर अपने , और आस पास की घटनाओं से दिल में उमड़ती भावनाओं को ही शब्दों में पिरोने की कोशिश है *" ऐ कविता"*

ऐ कविता..... तू आज फिर याद आई है

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  • Author Name:  Lata Jain
    About the Author: मैं प्रेमलता जैन एक साधारण सी महिला ..... आयुर्वेद में BAMS की पदवीधर , परंतु पेशे से उद्यमी । *" ऐ कविता "* वास्तव में ये कविताएं नही अपने मन की भावनाओं की स्वतः से ही की गई अभिव्यक्ति है । प्रारंभ से ही कुछ कुछ अंतर्मुखी ऐसा मेरा व्यक्तित्व रहा है । तो जब भी दिल में कोई बात आती अकेले में ही कागज कलम लेकर उसे शब्दों में उतारने का प्रयास करना धीरे धीरे मेरी आदत बन गई । और फिर धीरे धीरे दर्द औ गम ही नहीं खुशियां और मुस्कुराहटें भी शब्दों में उतर कर यादें बनती चली गई । जैसे जैसे जीवन आगे बढ़ता गया , अपने आस पास की घटनाएं जब भी मन को सुकून देती या विचलित करती , तो उन्हें भी मैं शब्दों में कैद करने लगी । हालांकि मैं कोई बहोत बड़ी कवियत्री तो नही हूं परंतु फिर भी अगर आप सभी को मेरा प्रयास पसंद आता है तो आपके शब्द मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरणादाई रहेंगे । साथ ही त्रुटियों के लिए आपका मार्गदर्शन भी जरूरी है । अतःइस किताब को पढ़ कर अपनी राय जरूर दीजियेगा ।
    Book ISBN: 9781005805562